ऐसे भी दिन जिए हैं मैंने

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ऐसे भी दिन देखे मैंने

ऐसे भी दिन देखे मैंने-
दो पल की खुशियाँ, अकेलापन, बेबसी के,
उन दिनों की बात ही अलग सी थी,
उन दिनों के चले जाने का कोई गम नहीं,
उन दिनों के वापसी की कोई उम्मीद भी नहीं,
पर जब भी उन दिनों को याद करती हूं-
दिल भर आता है या-
दिल खिल उठता हैं मेरा,
ऐसे भी दिन जिये हैं मैंने।
ऐसे भी दिन देखे मैंने।।

कुछ बातें बयान की ,कुछ दिल में ही रहने दिया,
यह सोचकर की कोइ समझेगा या नहीं।
लोगों को मौसम की तरह बदलते देखा मैंने,
दोस्त बनते हुए देखा तो-
दोस्त बदलते हुए भी देखा।
लोगों को बेनकाब होते हुए देखा,
दिल लगाते हुए देखा,
दिल तोड़ते हुए भी,
हाँ, ऐसे भी दिन जिए मैंने।
हाँ,ऐसे भी दिन देखे मैंने।।

कभी जीवन का खेल जीतते हुए तो –
कभी हारते हुए,
कभी कभी मंजिल के बीच थक जाना और हार मानना,
कभी आख़िर तक कोशिश करना जब तक मंजिल ना मिले।
किसी खास के मिलने की ख़ुशी तो-
किसी करीबी का बिचढने का गम,
कुछ यादें ऐसी की सोचकर दिल भर आए,
कुछ यादें ऐसी की कभी सोचने का दिल ना करे।
ऐसे दिन भी आए जब लोगों के ऊपर से विस्वास उठा,
कुछ दिन ऐसे भी आए जब खुद से नफरत हुई,
खुदसे नजर ना मिला पाना,
अकेलापन बेबसी भरे काले दिन।
सही कहते है लोग जिंदगी नहीं रुकती ,चलती जाती है,
जिंदगी ने अपनी रुख़ बदली-
खुद से प्यार होने लगा,
खुद को खुद ही सराहा-
खुद की मदद खुद करी,
खुद को रोका टूटने से,
टूटने पर खुद ही सम्भाला-
गिरकर मैनें,
मुश्किलों से खुद ही लड़ना सिखा मैंने,
कुछ दोस्त मिले जिन्होंने कभी साथ ना छोड़ा मेरा।
हाँ, ऐसे भी दिन जिये मैंने।
हाँ,ऐसे भी दिन देखे मैंने

The poem is about about the struggles that a person faces to succeed in his or her life. Such struggles lead to loneliness, helplessness, we also forget to love ourselves. Through this poem I wanted to convey no matter what happens Never Give Up.

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2 Comments

  1. Poetry is eternal graffiti written in the heart of everyone.♥️

  2. This is really a part of every person’s life and they need to know that no matters what happens Giving up is not worth it. Thanks for the reminder✌✨

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